वर्ण
वह मूल ध्वनि जिसके खंड या टुकड़े नहीं किए जा सके ' वर्ण ' कहलाते हैं । वर्ण सदा अखंडित रहता । जैसे - अ , क , ख , इ इत्यादि । इनका खंड नहीं किया जा सकता है अर्थात ये अखंडित है । इसलिए ये वर्ण है । रचना की दृष्टि से वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई है । वर्ण को अक्षर भी कहा जाता है । अक्षर अर्थात जिसका क्षय न हो अतः वर्ण या अक्षर का कभी नाश या क्षय नहीं होता है ।
अक्षर
अक्षर वर्ण का ही दुसरा नाम है । अक्षर अर्थात् जिसका क्षर या क्षय ना हो । अतः हम कह सकते है कि जिसका विनाश न हो सके उसे अक्षर कहते हैं ।
वर्णसंकेत
वर्गों को लिखने के लिए कुछ संकेतों को निश्चित किया गया है । इन निश्चित किए गए चिन्हों तथा संकेतो को ही ' वर्ण संकेत ' के नाम से जाना जाता है । वर्ण संकेत को ' लिपि ' भी कहा जाता है । प्रत्येक भाषा की अपनी अलग लिपि होती है । जैसे - हिन्दी भाषा को लिखने के लिए देवनागरी लिपि , अंग्रेजी भाषा को लिखने के लिए रोमन लिपि इत्यादि का प्रयोग किया जाता है ।
वर्णमाला
वर्णो के क्रमागत समूह को वर्णमाला कहते हैं । वर्णमाला के द्वारा हमें व्याकरण में प्रयुक्त किए जाने वाले वर्णो का ज्ञान प्राप्त होता है । हिन्दी वर्णमाला में शब्दों की संख्या को लेकर प्रत्येक विद्वानों के अपने अपने मत है । कुछ के अनुसार इनकी संख्या 46 है तो कुछ के अनुसार 48 या 49 है , पर आधुनिक हिन्दी व्याकरणानुसार वर्णमाला में वर्णो की कुल संख्या 51 है जो इस प्रकार हैं -
वर्णो के भेद
हिन्दी वर्णों के दो भेद होते हैं :
1. स्वर वर्ण
2 . व्यंजन वर्ण
शब्दों के निर्माण में ये दोनों समान रूप से सहायक होते है । किसी भी एक की अनुपस्थिति में शब्द के निर्माण की कल्पना कोरी है । अतः ये दोनों ही महत्वपूर्ण है ।
1. स्वर वर्ण - स्वर वर्ण उन वर्णो को कहते है जिनका उच्चारण बिना किसी दुसरे वर्ण की सहायता से होता है ।
ये वर्ण व्यंजन वर्णो के उच्चारण में सहायक होते है । हिन्दी वर्णमाला में स्वर वर्णों की कुल संख्या ग्यारह ( 11 ) है । ये निम्न है - अ , आ , इ , ई , उ , ऊ , ए , ऐ , ओ , औ । इनका उच्चारण कंठ , तालु के उपयोग से किया जाता है । इनके उच्चारण में जीभ तथा होठ का प्रयोग नहीं किया जाता है । ये दो प्रकार के होते हैं -
( i ) मूल स्वर और
( ii ) संयुक्त स्वर
