व्याकरण से क्या समझते हैं ?

 

व्याकरण से क्या समझते हैं ?


किसी भी भाषा के समुचित व्यवस्था तथा समुचित ज्ञान के लिए व्याकरण की आवश्यकता होती है । व्याकरण के द्वारा हम भाषा को शुद्ध रूप से पढ़ , लिख तथा संप्रेषित कर सकते हैं । व्याकरण का कार्य भाषा के शब्दों और वाक्यों का शुद्ध रूप से विवेचन करना है , अतः हम कह सकते हैं कि -

" व्याकरण वह शास्त्र है जिससे मनुष्य किसी भी भाषा को शुद्ध - शुद्ध पढ़ना , लिखना और बोलना सीखता है । "

प्रत्येक भाषा का अपना अलग - अलग व्याकरण होता है । हिन्दी भाषा को शुद्ध रूप से लिखने पढ़ने के लिए व्याकरण के उपयोग को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया गया है इसे हम भाषा के भेद भी कह सकते हैं ये निम्न है-

1. वर्ण विचार : व्याकरण के इस रुप में वर्गों के विषय में जानकारी दी जाती है । इसमें वर्गों के आकार , भेद एवं उच्चारण के विषय में ज्ञान दिया जाता है ।

2 . शब्द विचार : इस वर्ग में शब्दों के भेद , रीति , बनावट उत्पत्ति इत्यादि से संबंधित जानकारियाँ उपलब्ध करवाई जाती है ।

3 . वाक्य विचार : इसमें वाक्य बनाने , उसके भेद तथा वाक्य में आए शब्दों के आपसी - संबंधों से संबंधित जानकारियाँ रहती हैं ।

एक टिप्पणी भेजें (0)
और नया पुराने